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-: Introduction :-
Battery एक एसी डिवाइस है जिसमें हम energy स्टोर करते है , ताकि जरूरत पड़ने पर उसके बाद में उपयोग किया जा सके । Battery कैसे काम करती है आज हम इसमे बात करेंगे । हम छोटी इलेक्ट्रिकल डिवाइस को जैसे कि फ्लैशलाइट में बैटरी का इस्तेमाल करते है । यह एनर्जी , chemical energy के रूप में स्टोर होती है , और इसे जरूरत पड़ने पर electrical energy मे बदला जा सकता है ।
अगर एक बैटरी को लाइट से जोड़ते है तो बैटरी इलेक्ट्रॉनों को धक्का देने के लिए फोर्स प्रदान करेगी । जैसे इलेक्ट्रॉन लाईट मे प्रवाहित हो पाएंगे हमे बस सर्किट को पूरा करने के लिए लाईट को पॉजिटिव और नेगेटिव टर्मिनलों से कनेक्ट करना होगा । बैटरी के अंदर एक फिक्स्ड एनर्जी स्टोर होता है । लोड में कितनी ऊर्जा की जरूरत है हमे जानना होगा तभी हम बैटरी से कनेक्ट कर पायेंगे । जब हम इलेक्ट्रिकल सर्किट में लोड की बात करते है तो उसका अर्थ किसी भी ऐसे कंपोनेंट से हो सकता है जिसे चलाने के लिए इलेक्ट्रिसिटी की जरूरत होती है । यह कुछ ऐसी चीज हो सकती हैं जैसे resistance , LED , DC Motor etc । कुछ बैटरियों को फिर से चार्ज किया जा सकता है और यह जानकारी बैटरी पर स्पष्ट रूप से लिखी होती है । लेकिन घरेलू उपयोग में आने वाली आम alkaline battery को वापस चार्ज नहीं कर सकते । जब उनकी एनर्जी खत्म हो जाती है तो उन्हें डिस्पोज कर दिया जाता है । इन्हें recycle भी किया जा सकता है ।
-: Internal structure :-
एक साधारण 1.5V alkaline battery कुछ ऐसा दिखता है ।
मैन्युफैक्चर के अनुसार इसके रंग अलग-अलग हो सकते है । जब हम बैटरी को देखते हैं तो उसके ऊपर प्लास्टिक रैपर से कवर किया होता है । इससे बैटरी insulted होती है । साथ ही इस पर important जानकारी जैसे capacity और वोल्टेज के साथ-साथ पॉजिटिव और नेगेटिव terminal दिए होते है । पॉजिटिव टर्मिनल को cathode कहा जाता है । और इसकी terminal थोड़ी बड़ी होती है जो बाहर की ओर निकली होती है । नेगेटिव terminal को anode कहते है । हम जानते हैं यह दोनों टर्मिनल एक दूसरे से इलेक्ट्रिकली आइसोलेटेड होते है । रैपर के नीचे हमें primary casing दिखती है । ए आमतौर पर निकेल (Ni) की plating के साथ स्टील की बनी होती है । ए सभी अंदरूनी पुर्जो को अपनी जगह बनाए रखती है और उन्हें वातावरण के संपर्क में आने से बचाती है । जैसे हवा और पानी से । Casing के अंदर अलग-अलग पदार्थ की कई परदे होती है । इन मैटेरियल को खासतौर पर चुना जाता है क्योंकि रासायनिक प्रतिक्रिया यानी केमिकल रिएक्शन से निश्चित स्तर के वोल्टेज और करंट उत्पन्न होते है।
पहली परत कैथोड है जो मैंगनीज आक्साइड (MnO2) और ग्रेफाइट का मिक्सचर है । मिश्रण की conductivity और energy density बढ़ाने के लिए graphite का प्रयोग किया जाता है । हमे एक झारझरे पदार्थ की बनी परत मिलती है । आमतौर पर यह रेशेदार कागज होता है । जिससे एक barrier बनता है । जिसे हम Fibrous barrier केहेते है । बैरियर एनोड और कैथोड पदार्थ को सीधे एक दूसरे के संपर्क में आने से बचाता है । इससे बैटरी प्रयोग में न होने पर ज्यादा समय तक चलती है । अगर बैटरी में बैरियर ना हो तो शॉर्ट सर्किट हो तो short circuit हो जायेगा । पदार्थ में बने microscopic holes के कारण ion अनुओको प्रवाहित होने देते है । निर्माण प्रक्रिया के दौरान seperator पर पोटेशियम हाइड्रोक्सिड (KOH) का electrolytes liquid छिड़का जाता है । सेप्परेटर उसे अब्जॉर्ब कर लेता है । और लिक्विड एनोड पदार्थ में समाहित हो जाता है । इलेक्ट्रोलाइट का प्रयोग alkaline के तौर पर किया जाता है । इसलिए हम इस प्रकार की बैटरी को alkaline battery कहते है । बैरियर की एक और एनोड होता है जो की zinc यानी चुन का बना एक पेस्ट होता है , साथ ही साथ ही gelling agent भी है । Zinc powder के फार्म मे होता है। ताकी सर्फेस एरिया बोहोत बड जाए और इंटरनल रेजिस्टेंस घट जाता है । इस तरह इलेक्ट्रॉन के प्रवाह में सुधार होता है ।
Steal capsule एक नायलॉन प्लास्टिक के कैप में सील बंद होती है । उसके बाद zinc ऊपर लगे ए स्टील कैप मे एक brass pin डाली जाती है । इससे हमें नेगेटिव टर्मिनल मिलता है । गौर करें कि पॉजिटिव ओर नेगेटिव टर्मिनल एक दूसरे से प्लास्टिक कैप द्वारा अलग किए हुए होते हैं । यह सुनिश्चित करता है कि वह आपस में इलेक्ट्रिकली आइसोलेटेड हो , नहीं तो इलेक्ट्रॉन केसिंग से होकर पॉजिटिव टर्मिनल में पहुंच जाएंगे नही तो शॉट सर्किट हो जायेंगे।
-: Memorise :-
आपके घर में जो इलेक्ट्रिसिटी आते हैं वह ac है जो बैटरी से मिलने वाली इलेक्ट्रिसिटी से अलग होती है । अल्टरनेटिंग करंट में इलेक्ट्रॉन लगातार आगे और पीछे की ओर गति करते हैं । जिसकी तुलना समुद्र की उठती गिरती लहरों से की जा सकती है । इसीलिए उसको पर एक एक लहर यानी वेव के रूप में दिखाई देता है । जो पॉजिटिव और नेगेटिव दोनों क्षेत्रों में जाता है क्योंकि यह आगे और पीछेकि गति कर रहा है मतलब पॉजिटिव को नेगेटिव में ।
Atom:-
अगर cupper के तार के एक टुकड़े को देखें तो तार के अंदर हमें कॉपर के atoms दिखाई देते है । अनु यानी एटम में केंद्र में protons और neutrones होते है । प्रोटेंस में पॉजिटिव चार्ज होता है और neutrones neutral होते हैं क्योंकि उनमें कोई चार्ज नहीं होता । और न्यूक्लियस के बाहर घूमने वाले अनु इलेक्ट्रॉन है । इलेक्ट्रोंस में नेगेटिव चार्ज होता है ।
इनमें से कुछ इलेक्ट्रॉन एक एटम से दूसरे एटम में जाने के लिए free होते है । वह अपने आप ही अन्य अनु में जाते है लेकिन बिना किसी दिशा के , जो हमारे लिए उपयोगी नहीं है । हमें चाहिए कि इलेक्ट्रोंस एक ही दिशा में गति करें और ऐसा करने के लिए हम पावर सोर्स में वोल्टेज डिफरेंट देते है जैसे की बैटरी । जब हम एटम्स कि बात करते है तो अपने अकसर ions के बारे मे सुना होगा ।
Ion:-
इक ions बस एक आइटम होता है जिसमें इलेक्ट्रोंस और प्रोटेंस की संख्या बराबर नहीं होती । एटम में न्यूट्रल चार्ज होता है क्योंकि उसमें इलेक्ट्रोंस और प्रोटेंस की संख्या बराबर होती है । क्योंकि प्रोटेंस में पॉजिटिव चार्ज होता है और इलेक्ट्रोंस में नेगेटिव तो वह आपस में संतुलित हो जाते है ।अगर एटम में प्रोटेंस की संख्या से एक अधिक इलेक्ट्रॉन हो तो वह negative ion होगा । एटम्स मै electron संख्या से अधिक प्रोटेंस हो तो वह positive ion होगा ।
😃 -: Mechanism :- 😃
आपको याद होगा हमने आइटम के बारे में थोड़ी बात की थी । बैटरी के अंदर यह विभिन्न मटेरियल तरह-तरह के आइटम से बने होते हैं , जो आपस में कसकर जुड़े होते है । जब हम इन सभी मैटेरियल्स को एक साथ कैपसूल में मिलाते है तो एक छोटी सी chemical reaction होती है , और एटम आपस में क्रिया करने लगते हैं । सबसे पहले electrolyte के अंदर का हाइड्रोक्साइड आयन (OH-) atom , एनोड के अंदर Zn atom से जुड़ जाता है । इस रासायनिक प्रतिक्रिया को oxidation के नाम से जाना जाता है । और इससे जिंक हाइड्रोक्साइड [ Zn(OH)2] बनता है । Zn और OH- मिलने से electron निकलते है । यह इलेक्ट्रॉन अब घूमने के लिए free होते है , और brass pin पर इकट्ठा हो जाते है । उसी समय मैंगनीज ऑक्साइड (Mgo2) molecule इलेक्ट्रोलाइट के water molecule ( H2O)💦 के साथ-साथ free electron से conjugate हो जाता है । इस रासायनिक प्रतिक्रिया को Reduction कहते हैं । रासायनिक प्रतिक्रिया के दौरान MgO थोड़े अलग प्रकार के MgO में बदल जाता है । इस प्रकार के MgO2 को OH- ions की जरूरत नहीं होती है और यह उसे इलेक्ट्रोलाइट में भेज देता है । Oxidation प्रतिक्रिया से निकला हुआ यह एटम water एटम की जगह ले लेता है । अब OH- free हो जाता है और separator से गुजर सकते है । इलेक्ट्रोन पर नेगेटिव चार्ज होता है । इसलिए पॉजिटिव की तुलना में नेगेटिव टर्मिनल अधिक इलेक्ट्रॉन है । इसका मतलब दोनों terminal के बीच voltage मे अंतर है और इसे हम मल्टीमीटर से माप सकते हैं । याद रखें हम केवल दो अलग बिंदुओं के बीच वोल्टेज का अंतर माप सकते हैं । इलेक्ट्रॉन एक दूसरे को धकेलते हैं और कम इलेक्ट्रॉन वाले स्थान पर जाना चाहते हैं । पॉजिटिव क्षेत्र में कम इलेक्ट्रॉन होते हैं , इसलिए वे इस टर्मिनल पर पहुंचने का प्रयास करते हैं । पॉजिटिव टर्मिनल पर पहुंचने के लिए सेपरेटर उन्हें बैटरी से होकर गुजर्नर्स रोकते है । इस लिए इलेक्ट्रॉनों को दूसरे रास्ते की आवश्यकता होती है । यदि हम इलेक्ट्रॉनों को एक बाहरी पाथ प्रदान करें जैसे कोई तार , तो इलेक्ट्रॉन उसे होकर पॉजिटिव टर्मिनल तक पहुंच जाएंगे । इलेक्ट्रोन्यो के रास्ते में लैंप जैसी कोई चीज रखने से इलेक्ट्रॉनों को उससे होकर गुजरना पड़ेगा ।
और इससे हम अपने कई काम निकाल सकते हैं । जैसे लैंप को प्रकाशित करना । जब तक टर्मिनल्स के बीच का सर्किट पूरा है रासायनिक प्रतिक्रिया होती रहेगी । और इलेक्ट्रॉन नेगेटिव टर्मिनल से बहते रहेंगे । यदि हम तार हटा दे सर्किट ब्रेक कर दे तो रासायनिक प्रतिक्रिया रुक जाएगी ।
⭐हालांकि बैटरी के अंदर निश्चित मात्रा में ही पदार्थ होता है । इसलिए समय के साथ-साथ रासायनिक प्रतिक्रिया होते रहना कठिन हो जाता है । और अंत में सारे इलेक्ट्रॉन खत्म हो जाते है । इस बिंदु पर बैटरी उपयोगी नहीं रह जाती और उसका निस्तारण कर देना चाहिए ।
-: Connection of batteries :-
हम बैटरी का प्रयोग करके कॉम्पोनेंट्स को एनर्जी दे सकते है । लेकिन आमतौर पर किसी डिवाइस को ऊर्जा देने के लिए एक बैटरी पर्याप्त नहीं होती है । इसके लिए हमें बैटरी को आपस में जोड़ना पड़ता है । हम दो तरीकों से बैटरियों को कनेक्ट कर सकते हैं series में या parallel।
Series:-
जब हम बैटरी को सीरीज में जोड़ते हैं तो हर बैटरी की वोल्टेज आपस में जुड़ जाती है । 1.5V की दो बैटरी 3V देगी । 1.5V तीन battery 4.5V देगी । वोल्टेज बढ़ जाती है क्योंकि हर बैटरी इलेक्ट्रॉनों को बूस्ट करती है । इसलिए हमें अधिक वोल्टेज मिलता है ।
Parallel:-
यदि हम बैटरी को पैरेलल में कनेक्ट करें तो हमें केवल 1.5 वोल्ट से मिलेंगे । चाहे कितनी भी बैटरी जोड़ दे । ऐसा इसलिए होता है क्योंकि सप्लाई पर तो पाथ एक में होते हैं लेकिन रिटर्न पर भाग हो जाती है । इसलिए इलेक्ट्रॉन बूस्ट नहीं हो पाते हैं । हालांकि इस कंफीग्रेशन में करंट अधिक मिलता है । और इसकी कैपेसिटी भी अधिक होती है । जिससे हम किसी बड़ी डिवाइस को ऊर्जा दे सकते हैं ।
Example:- उदाहरण के लिए यदि बैटरी की कैपेसिटी 1200 mAh है । और हम इसे पैरेलल में लगा दे तो इसकी capacity 2400 mAh हो जायेगी । लेकिन वोल्टेज 1.5 वोल्ट हि रहेगी । यदि हम उन्हें सीरीज में लगा दें तो कैपेसिटी 1200 mAh ही रहेगी लेकिन वोल्टेज 3V हो जायेगी।
-: Rating of a Battery :-
हम सर्किट को ऊर्जा देने के लिए बैटरी का प्रयोग करते हैं । पर एक बैटरी सर्किट को कितने समय तक ऊर्जा दे सकती है । पैकेजिंग या डाटा शीट देखें तो इसके आगे mAh लिखा हुआ है । यह mili-amp -hour रेटिंग है ।
उदाहरण के लिए एक बैटरी कि रेटिंग 2500 mAh है, इसका अर्थ है के -इस प्रति घंटे करंट प्रदान करना चाहिए 2500mA या 2 घंटे के लिए 1250 mA या फिर 125 घंटे के लिए 20 mA । हालांकि व्यावहारिक रूप से यह इतनी देर तक नहीं चलेगी । क्योंकि जैसे-जैसे यह खाली होती है रासायनिक प्रतिक्रिया होने के कारण बैटरी का इंटरनल रेजिस्टेंस बदलता रहता है । बैटरी से सटीक उपयोगिता अवधि की गणना करने का कोई विशेष तरीका नहीं है इसको टेस्ट करना ही सबसे अच्छा तरीका है । हालांकि नीचे दिए गए सूत्र से हम अनुमान लगा सकते है 👇👇👇
Battery life= capacity (mAh) ÷ circuit current (mA)
Example:- सर्किट में 19 mA की जरूरत है । और बैटरी की कैपेसिटी 3000 mAh। तो 3000 को 19 से डिवाइड किया तो वह 157.2 h ।
-: Voltage Reading :-
वोल्टेज मापने के लिए हम मल्टीमीटर में डीसी फंक्शन चुनेंगे । फिर लाल तार को पॉजीटिव टर्मिनल और काली तार को नेगेटिव टर्मिनल से कनेक्ट करेंगे । इससे हमें वोल्टेज की रीडिंग मिलेगी ।
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