Intruduction:-
DC motor कई प्रकार की हो सकती है । हम इनका प्रयोग इलेक्ट्रिकल एनर्जी को मैकेनिकल एनर्जी में बदलने के लिए किया जाता है । और हम इनका प्रयोग अपनी कुछ चीजों जैसे की पावर टूल्स , टॉय car ,पंखे में कर सकते हैं ।
Model:-
जब हम डीसी मोटर को देखते हैं तो सबसे पहले हम एक धातु की बनी प्रोटेक्टिव केसिंग दिखती है जो stator बनाती है । एक सिरे पर हमारे पास casing से निकली हुई shaft की नॉप है , जिस पर हम गियर ,पंखे के ब्लड या pully जोड़ सकते हैं । दूसरे सिरे पर हमारे पास दो टर्मिनल वाली एक plastic end cap है । Shaft को घुमाने के लिए हम इन टर्मिनलों को पावर सप्लाई से जोड़ सकते है । अगर हम मोटर को अंदर से देखने के लिए casing हटा दे तो हमें दो चुंबक नजर आते हैं जो stator बनाते हैं । यह permanant magnet होते हैं जो North and South pole बनाते हैं । हमे मोटर के केंद्र से होकर घूमता हुआ एक रोड दिखता है जिसे हम shaft कहते हैं। शाफ्ट का प्रयोग मैकेनिकल एनर्जी को ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है । शाफ्ट के साथ rotor जुड़ा हुआ है । Rotor कई सारी disk से बना है जिन्हें एक साथ लेमिनेट किया गया है । हर डिस्क में p के आकार की भुजाएं बनाई गई है । P आकर की भुजाओं पर coil binding लिपटी हुई है जो बैटरी से इलेक्ट्रिकल करंट को ले जाति है। जैसी ही करेंट कोयल से होकर गुजरती है यह एक इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड बनाता है और हम rotation यानी घूर्णन उत्पन्न करने के लिए इस मैग्नेटिक फील्ड के समय और इसकी ध्रुवीयता या पोलैरिटी को नियंत्रित करते हैं । कोयल के तार commutator प्लेट से जुड़े होता है । कम्यूटर एक रिंग होती है जिससे कई plate में विभाजित किया गया है । जो shaft के चारों और केंद्र के और मुख करके लगाई गई है । प्लेट पृथक किए गई है और शाफ्ट के साथ-साथ एक दूसरे से भी इलेक्ट्रिकली आइसोलेटेड होती है । हर कोयल का सिरा एक अलग कम्यूटर plate से जुड़ा होता है । ऐसा एक सर्किट बनाने के लिए किया जाता है और इसके बारे में थोड़ी ही देर में विस्तार से जानेंगे ।
प्लास्टिक के बैग कवर में brass , brass arm और terminal होते है । Commutator plating दो brass ओ के बीच लगी होती है । Brass circuit पूरा करने के लिए commutator के plate पर घिसते हैं । तब इलेक्ट्रिसिटी टर्मिनल से और arm से होकर ब्रश में commutator segment coil मे जाते है और फिर बाहर दुसरे कम्यूटेटर सेगमेंट मे जाति है । फिर विपरीत मै ब्रास से होकर फिर वापस दूसरे टर्मिनल में जाती है । इन equipment से मिलकर हमारी साधारण डीसी मोटर बनती है ।
डीसी मोटर के काम करने के तरीके को समझने के लिए हमें इलेक्ट्रिसिटी से जुड़ी कुच बातें समझ नहीं होगी और यह भी समझना होगा कि अंदर के equipment कैसे काम करते है ।
लेकिन पहले जाने की अपने डीसी मोटर का प्रयोग कहां देखा है या आप इसका इस्तेमाल कहां कर सकते हैं अपने विचार और प्रोजेक्ट आईडियाज नीचे कमेंट सेक्शन में मुझे बताएं
Electricity:-
इलेक्ट्रिसिटी वायर से होकर गुजरने वाला इलेक्ट्रोनों का प्रवाह है । जब बहुत से इलेक्ट्रॉन एकही दिशा में बहते हैं तो हम इस करंट कहते हैं । डीसी इलेक्ट्रिसिटी का मतलब है इलेक्ट्रॉन एक दिशा में बहते हैं यानी एक बैटरी के टर्मिनल से दूसरी बैटरी के टर्मिनल तक । यदि हम बैटरी को उलट दे तो करंट विपरीत दिशा में बहने लगेगा । कॉपर वायर के अंदर हमें कॉपर के अनु मिलते हैं और हर अनु के चारों ओर मुक्त इलेक्ट्रॉन चक्कर लगाते रहते हैं । इन्हे मुक्त इलेक्ट्रॉन इसलिए कहा जाता है के ए अन्य अनु मे जाने के लिए स्वतंत्र होते हैं । वे स्वाभाविक रूप से अपने आप अन्य अनु में जाते रहते हैं लेकिन यह सभी दिशाओं में बिखरे हुए तरीके से गति करते हैं जिसका हमारे लिए कोई उपयोग नहीं है । हमारे लिए आवश्यक है कि बहुत से इलेक्ट्रॉन एक ही दिशा में बहे। और ऐसा करने के लिए हम वोल्टेज का प्रयोग कर सकते हैं । वोल्टेज एक दबाव की तरह होती है और इलेक्ट्रोनिक को बेहेने के लिए मजबूर करती है । इलेक्ट्रॉन केवल पूरे सर्किट में बहते हैं । वह हमेशा अपने स्रोत पर वापस जाने की कोशिश करते रहते हैं । इसलिए जब हम इन्हें वायर जैसा एक रास्ता देते हैं तो वह उसे होकर गुजरती है ।
Electron flow and conventional current:-
इलेक्ट्रॉन फ्लो वोह है जो वास्तव में इलेक्ट्रॉन के नेगेटिव टर्मिनल से पॉजिटिव टर्मिनल की ओर बहने से उत्पन्न हो रहा है । कन्वेंशनल करंट इनके विपरीत दिशा में यानी पॉजिटिव से नेगेटिव की ओर बहने से उत्पन्न होता है । इन दोनों नियमों को याद रखिए और यह भी कि हम किस नियम का प्रयोग कर रहे हैं ।
Property of permanant magnet :-
जैसा कि शायद आप पहले से ही जानते होंगे चुंबक में दो ध्रुव होते हैं उत्तरी ध्रुव और दक्षिणी ध्रुव । इस प्रकार के चुंबकों को स्थाई चुंबक कहा जाता है । क्योंकि इनके चुंबकीय क्षेत्र हमेशा सक्रिय रहते हैं । दूसरे चुंबक के दायरे में आने पर एक जैसे किनारे एक दूसरे को दूर देखते हैं और विपरीत किनारे आकर्षित होती है । इसलिए चुंबक के चुंबकीय क्षेत्र के कारण विकर्षण यानी पुशिंग और आकर्षक यानी पुलिंग फोर्स बनती है । चुंबक में एक कर्व जैसी चुंबकीय क्षेत्र की रेखाएं होती हैं ,जो उत्तरी ध्रुव से दक्षिणी ध्रुव की ओर जाती है और बाहर की बढ़ती और घूमती जाती है । चुंबकीय क्षेत्र अंतिम टर्मीनल पर सबसे ज्यादा शक्तिशाली होता है । हम इसे देख सकते हैं क्योंकि यह और भी चुंबकीय रेखाएं पास-पास है ।
वास्तव में हम चुंबक पर लोहे का बुरादा चिड़कर चुंबक के चुंबकीय क्षेत्र को देख सकते हैं जब दो चुंबक एक दूसरे के करीब आते हैं तो उनके चुंबकीय क्षेत्र आपस में टकराती है । दो एक जैसे pole एक दूसरे को धक्का देकर दूर करेंगे और उनकी चुंबकीय क्षेत्र की रेखाएं नही जुड़ेंगे । जबकि दो विपरीत बले pole एक दूसरे की ओर आकर्षित होंगे और उनकी चुंबकीय रेखाएं आपस में मिल जायेंगे । इसलिए हम दो विपरित पोल बाले चुंबक, मोटर के scaletor में रखते हैं ताकि रोटर से होकर शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र बन जाए ।
Property of Electromagnet :-
जब हम एक वायर को बैटरी के पॉजिटिव और नेगेटिव टर्मिनल से जोड़ते हैं तो इलेक्ट्रॉन का करंट वायर से होकर दोनों टर्मिनलों के बीच गुजरता है । जब इलेक्ट्रॉन कॉपर वायर से होकर गुजरते हैं तो वह वायर के चारों ओर इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड बनाते हैं । जब हम वायर के पास कुछ चुंबक रखकर इस इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड को देख सकते हैं । जब हम वायर में इलेक्ट्रिसिटी प्रवाहित करते हैं तो चुंबक घूमता है । जब हम करंट की दिशा पलट देते हैं तो चुंबक की दिशा भी पलट जाती है और विपरीत दिशा में आ जाती है । इस प्रकार हम एक चुंबकीय क्षेत्र बना सकते हैं जो एक स्थाई चुंबक की तरह ही काम करता है ।
अंतर सिर्फ यह है कि हम चुंबकीय क्षेत्र को बंद कर सकते हैं । वायर के इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड में समस्या यह है यह बहुत कमजोर होता है लेकिन हम वायर को कोयल में लपेटकर इस इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड को और शक्तिशाली बना सकती हैं । प्रत्येक वायर अभी भी इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड बनाएगा लेकिन वह मिलकर अधिक बड़ा और अधिक शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र बनाएंगे । इसलिए हम रोटर के चारों ओर कोयल का प्रयोग करते हैं ।
Equipments :-
1) Windings:-
वायर के कोयल को वाइंडिंग कहते है। सबसे साधारण डीसी मोटर में बस एक ही कोयल होता है । यह अधिक बहुत ही सरल डिजाइन होता है । हालांकि समस्या यह है ए चुंबकीय रुप से aline हो सकती है यानी एक सीड में आ सकते हैं । जैसे मोटर जाम हो सकती है और घूमना बंद कर सकती है । हमारे पास coil के जितने अधिक सेट होंगे घूमने उतना स्मूथ होगा । यहां तक विशेष रूप से कम गति वाली मशीनों में उपयोगी होता है । इसलिए हम रोटर में सामान्य तौर पर कम से कम तीन coil का प्रयोग करते है । जिससे वहां आसानी से घूम पाए । एक कोयल पिछली कोयल से 120 डिग्री एंगल पर रखा जाता है। हर कोयल के बीच में एक commutator plate लगी होती है । ए प्लेट एक दूसरे से इलेक्ट्रिकली आइसोलेट होते हैं । लेकिन ए एक दूसरे से जुड़े होते हैं । यदि कम्यूटर प्लेटो के 2 टर्मिनल को बैटरी से जोड़ देते हैं तो करंट का बहाना लगेगा और coil में चुंबकीय क्षेत्र बन जाएगा ।
Rotor:-
Rotot या armature लोहे की बहुत सी डिस्क से बना होता है जो आपस में लैमिनेटेड होती है । प्रत्येक डिस्क एक lackward coding द्वारा एक दूसरे से इलेक्ट्रिकली इंसुलेटेड होती है । अगर armature ठोस धातु के एक ही टुकड़े से बना होता तो eddy करंट अंदर ही घूमता रहता । ऐसा इलेक्ट्रोमोटिव फोर्स एमएफ के कारण होता है । यह एड्डी करंट मोटर की कार्य कुशलता को प्रभावित करता है । एड्डी करंट को कम करने के लिए इंजीनियर rotor को इंसुलेटेड डिस्क में डिवाइड कर देते हैं । इस तरह इंसुलेटेड disk अभी भी बहता है , लेकिन यह अब बहुत छोटा है । जितना पतला होगा एड्डी करंट उतना ही छोटा होगा ।
Commutator:-
कम्यूटर छोटी-छोटी कॉपर की प्लेटों से बना होता है जो shaft पर लगी होती है । प्रत्येक प्लेट एक दूसरे से और shaft से भी इलेक्ट्रिकली इंसुलेटेड होती है । प्रत्येक कोयल का सिरा एक अलग कम्यूटर प्लेट से जुड़ा होता है । इस डिजाइन में प्रत्येक कम्यूटर प्लेट दो कोयल ओ से जुड़ी होती है। प्लेट ए कोयल मै इलेक्ट्रिसिटी पोहोचाती है । बैटरी से इलेक्ट्रिसिटी लेने और प्लाटों में देने के लिए कुछ ब्रश होती है जो प्लेट से रगड़ खाते है । Brush arm इन्हें अपनी जगह रखते है । जब हम सर्किट को पूरा करते हैं तो इलेक्ट्रिसिटी ब्रश से होकर कम्यूटर सेगमेंट में बहती है और फिर वह एक और दो कोइलो में जाता है , क्योंकि उसे रास्ता मिल जाता है ।
Rotation के एक निश्चित बिंदु पर ब्रश दो प्लेट के के संपर्क में आता है और इसे एक electric arc बनता है और नीली रोशनी के ऐसे छोटे धमाके होते हैं । आर्क और घर्षण धीरे-धीरे इन ब्रशो को खत्म कर देते हैं ।
Fleming left hand rule:-
हमें Fleming left hand rule (FLHR) के बारे में जरूर पता होना चाहिए । और इसके लिए याद रखें कि FLHR कन्वेंशनल करंट का प्रयोग करता है इलेक्ट्रॉन फ्लू का नहीं । कन्वेंशनल करंट पॉजिटिव से नेगेटिव की ओर बहता है । जब electromagnatic field and the permanant magnetic field एक दूसरे को इंटरेक्ट करता है तब कौन सी डायरेक्शन पर अट्रैक्ट हर्बल करेगा कि हमें बताता है FLHR ।
Explanation :- left hand के thumb, index aur middle finger को mutually परपेंडिकुलर रखे तो thumb force , index magnatic field और middle finger current की direction को denote करेगा।
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