Capacitor क्या है ?? इससे झटका भी लग सकता है क्या ??

INTRODUCTION :- 

Capacitor एक Electronic Device होता है। किसी के लिए हर जगह मतलब हर सर्किट में उसे होता है उसको ठीक रखने के लिए। Capacitor बैटरी की तरहा काम करता है । लेकिन बैटरी के तुलना में कैपेसिटर बहुत कम एनर्जी store करता है। इसमें चार्ज का स्टोर और रिलेस होना बहुत जल्दी होता है।

Example:-

एक पानी का सोर्स है उसे पानी बह  से पानी बह रहा है। और उसको को हमने एक टंकी से जोड़ दिया। अब हमने पानी के सोर्स को इन किया ।
उस टंकी से पानी बहताही रहेगा जब तक नल खुला है।अगर सोर्स को बंद कर दिया टंकी को फुल करने के बाद तो भि कुछ समय के लिए पानी बहती रहेगा। ठीक इसी तरह कैपेसिटर भी जब तक करंट है सर्किट में तब तक तो लाइट जलता ही रहेगा लेकिन अगर करंट चला भी गया तो कुछ सेकेंड के लिए लाइट चमकेगा।

Working process:

चलो जानते हैं तो ए कैसे काम करता है। एक साधारण कैपेसिटर के अंदर सुचालक धातु की दो प्लेट होती है जो आमतौर पर एल्यूमीनिया या एल्युमिनियम की बनी होती है । इन्हें सिरेमिक जैसे डाई इलेक्ट्रिक कुछ पदार्थ से अलग किया जाता है। डाइलेक्ट्रिक का मतलब है की सामग्री विद्युत के संपर्क में होने पर ध्रुवीकरण करेगी । Capacitor की एक तार को बैटरी की पॉजिटिव और दूसरी तार को नेगेटिव टर्मिनल से जोड़ा जाता है। आप देखेंगे कैपेसिटर की नेगेटिव टर्मिनल छोटा और पॉजिटिव टर्मिनल बड़ा होता है। जब कैपेसिटर होके करेंट गुजर ता है तब, कैपेसिटर की एक प्लेट पर इलेक्ट्रॉन जमा हो जाएंगे ।

और दूसरी प्लेट कुछ इलेक्ट्रॉन छोड़ देगी फिर भी कुचालक पदार्थ होने के कारण इलेक्ट्रॉन कैपेसिटर से होकर नहीं गुजार सकते । अंत में कैपेसिटर और बैटरी की वोल्टेज समान हो जाएगी और इलेक्ट्रोन का बहाना बंद हो जाएगा। आपका कैपेसिटर के एक तरफ इलेक्ट्रॉन जमा हो चुका हैं। जिसका मतलब है कि हमारे पास एनजी स्टोर हो चुका है। और हम जब चाहे इसे रिलीज कर सकते हैं ।क्योंकि एक तरफ इलेक्ट्रॉन अधिक है ,और इलेक्ट्रोन  नेगेटिव चार्ज  होते हैं तो इसका मतलब यह है कि हमारे पास एक तरफ पॉजिटिव और दूसरी तरफ नेजिएटिव चार्ज  है । और इन दोनों के बीच में पोटेंशियल या वोल्टेज का अंतर होगा।  हम इसे मल्टीमीटर से माप सकते हैं। वोल्टेज प्रेशर की तरह है। दो साइड को मापने पर जो वोल्टेज का अंतर आता है वह इलेक्ट्रोन के इकट्ठा होने से होता है।  बैटरी से अलग करने पर भी यही रीडिंग आती रहेगी । चुंबक के बारे में याद करें विपरीत बिंदु एक दूसरे को आकर्षित करते हैं।  और एक दूसरे की ओर खींचते हैं।  यही capacitor के दो प्लेट के साथ होता है। एक प्लेट पूरी तरह नेगेटिव और दूसरी पॉजिटिवली चार्ज हो जाता है। दो प्लेटो के बीच फोर्स ऑफ अट्रैक्शन होते लेकिन इलेक्ट्रॉन पॉजिटिव की तरफ जा नही सकता क्योंकि कुचालक या डाइलेक्ट्रिक पदार्थ के कारण।  अब हम सर्किट में एक छोटा LED जोड़ दे तो इलेक्ट्रॉनों को बहने और दूसरी तरफ पहुंचने का रास्ता मिल जाता है तो इलेक्ट्रॉन लाइट से बहते हुए इसे पावर देता है और कैपेसिटर की दूसरी तरफ पहुंच जाते हैं।  हालांकि यह थोड़ी समय के लिए ही होता है जब तक दोनों तरफ के इलेक्ट्रॉन बराबर ना हो जाए।  इसके बाद वोल्टेज शून्य हो जाएगा। खिंचाव के लिए कोई फोर्स नही होगा ।  फिर से हम बैटरी जोड़ देते है और capacitor चार्ज होने लगते है। इससे हमें बिजली की कमी रोकने की में मदद मिलती है । 

Uses:-

कैपेसिटर का उपयोग इंडक्शन मोटर , छठ के पंखों और एयर कंडीशनर में किया जाता है, और भी कही जगाओ पर।आर बहुत बड़ा बाला कैपेसिटर भी मिलते हैं जिनका  प्रयोग बड़ी इमारत में दुर्लभ पावर फैक्टर को ठीक करने के लिए किया जाता है । कैपेसिटर के एक हिस्से में हमें दो मां मिलेंगे यह मन capacitance और voltage होते हैं। कैपेसिटर का कैपेसिटेंस farad की यूनिट में मापा जाता है।  आमतौर पर कैपेसिटर को microfarad यूनिट मापा जाता है । कैपेसिटर मै जो वोल्टेज दिखाया जाता है वोह max voltage होता है। उससे अधिक होने पर capacitor खराप हो जाएगा।

Types of Capacitor:-

Capacitor बेसिकली तीन टाइप की होती है। (1) parallal capacitor  (2) cylindrical capacitor (3) spherical capacitor
 
              
 कैपेसिटर के साथ काफी सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि अब हम जानते हैं कि यह उर्जा संग्रहित करता है ।और इससे सर्किट से अलग होने के बाद भी लंबे समय तक उच्च वोल्टेज हो सकती है। वोल्टेज चेक करने के लिए हम मीटर को डीसी वोल्टेज पर लाते हैं और लाल तार को कैपेसिटर के धनात्मक और काली तार को ऋणात्मक सिरे से जोड़ देते है। अगर उससे ज्यादा वोल्टेज हो तो रेजिस्टेंस की मदद से वोल्टेज को काम करना चाहिए। 

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